क्या कारण हैंकि जोंक (leech) पर नमक डालते ही वह मर जाता है और रक्त प्रवाहित होने लगता है ?

by

in

आपने अकसर देखा होगा कि नमक को खुले में रखने से कुछ दिन के बाद वो चिपचिपा हो जाता है और इसी हाल में रहने पर पूरी तरह से पिघल जाता हैं।

ये ऐसा इसलिए होता है कि नमक हवा से नमी ( हवा में घुली पानी की बाफ) सोंख लेता हैं। जब तक नमक में नमी की मात्रा कम रहती है तब तक वो चिपचिपा बनकर रहता हैं। मगर जैसे नमी की मात्रा बढ़ती हैं तो पूरी तरह से पिघल जाता हैं।

जब हम जोंक / Leech कीड़े पर नमक छिड़कते हैं तो नमक तुरंत उसके शरीर / पेशीयों से पानी सोंखना शुरु कर देता हैं। उसके शरीर में पानी कम हो जाने के कारण वो छटपटाता है और आखिर मर जाता हैं। जोंक / Leech कीड़े की त्वचा / चमड़ी नाजूक होती हैं और उसमें से नमी की आवाजाही आसनी से होती हैं। नमक की कीड़े के शरीर के अंदर से पानी सोंक लेने की प्रक्रिया को रसायन विज्ञान में Osmotic Pressure के नाम से जाना जाता हैं।

कुदरत ऐसे जीवों में ये खूबी बनाके रखती है इस कारण वे अपने परिसर / environment से जरूरत होने पर पानी सोंख लें। इस तरह की व्यवस्था इस प्रजाति के अनेक जीवों में होती हैं। मिसाल की तौर पर – earth worm जो बारीश के मौसम में कीचड में पाये जाते हैं – में भी होती हैं।

इमेज सोर्स गूगल

अपने बचपन में मैं ऐसा बहुत करती थी लेकिन हमेशा सोचती थी कि नमक के संपर्क में आने पर इतना क्यों मुरझा जाता है।

जोंक अपने वातावरण में बदलाव के प्रति संवेदनशील होती हैं, और नमक उन कारकों में से एक है जो उनके लिए हानिकारक हो सकता है। जब एक जोंक नमक के संपर्क में आती है, तो यह जोंक को ऑस्मोसिस के माध्यम से पानी खोने का कारण बन सकती है। इससे जोंक निर्जलित हो सकती है और अंततः मर सकती है।

ऑस्मोसिस एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली में पानी के अणुओं का प्रसार है, जो उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र में होता है। जब एक जोंक नमक के संपर्क में आती है, तो नमक के कण जोंक के अंदर इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी के संतुलन को बाधित कर सकते हैं। इससे पानी जोंक की कोशिकाओं को छोड़ने का कारण बन सकता है, जिससे कोशिकाएं सिकुड़ सकती हैं और निर्जलित हो सकती हैं। यह जोंक के सामान्य शारीरिक कार्यों को भी बाधित कर सकता है और अंततः मृत्यु का कारण बन सकता है।

इमेज सोर्स गूगल

ऑस्मोसिस के अलावा, नमक जोंक के सामान्य चयापचय और पीएच स्तर को भी बाधित कर सकता है, जो जोंक को और नुकसान पहुंचा सकता है। नमक भी रासायनिक प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकता है जो जोंक की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे यह संक्रमण या बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

Open chat
Hello
Can we help you?